ठेकेदार के रेत साम्राज्य पर हमला, 14 रेत ट्रक जब्त, अवैध धर्मकांटा सील

मुर्गेश शेट्टी,बीजापुर – जिले के तारलागुड़ा में रेत माफिया और ठेकेदारों पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा है। तहसीलदार लक्ष्मण राठिया ने रविवार के राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम के साथ तेलंगाना ले जाए जा रहे 14 ट्रक रेत से भरे वाहनों को जप्त कर लिया।

जप्त की गई गाड़ियों में 11 ट्रक प्रभाकर चौधरी और 3 ट्रक श्रीनिवास के बताए जा रहे हैं। उक्त कार्यवाही जीएसटी में गड़बड़ी, भंडारण की मात्रा और शासकीय भूमि पर अवैध धर्मकांटे को लेकर किया गया है। कार्रवाई के बाद प्रकरण बनाकर एसडीएम कार्यालय को भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक रेत ठेकेदार लंबे समय से सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर खुलेआम रेत का साम्राज्य चला रहे हैं। अंतरराज्यीय परिवहन का मामला होने के बावजूद ठेकेदारों ने कर चोरी कर करोड़ों का मुनाफा कमाया।

सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि तारलागुड़ा में शासकीय भूमि पर अवैध तरीके से धर्मकांटा बनाया गया है। पहले भी इस धर्मकांटे को बेदखली कर सील किया गया था, लेकिन धर्मकांटा संचालक ने ताला तोड़कर दोबारा संचालन शुरू कर दिया था। अब तहसीलदार ने इस पर फिर से ताला जड़ दिया और स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर किसी भी हाल में कारोबार नहीं चलने दिया जाएगा।

कार्रवाई के बाद भी तिमेड़ और चंदूर रेत भंडारण स्थलों पर तेलंगाना के ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई ड्राइवर पकड़े जाने के डर से खदान में ही रेत खाली कर भाग खड़े हुए। इससे साफ है कि बड़े पैमाने पर रेत तेलंगाना के लिए सप्लाई की जा रही थी।

सूचना के आधार पर रेत से भरे 14 ट्रकों को जप्त कर थाने को सुपुर्द किया गया है। इसके अलावा रेत भंडारण की जांच की जा रही है। साथ ही शासकीय भूमि पर बनाए गए अवैध धर्मकांटे को सील कर दिया गया है। जीएसटी से जुड़ी अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा रही है।” – लक्ष्मण राठिया (तहसीलदार) भोपालपटनम

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत ठेकेदार प्रशासन की नाक के नीचे वर्षों से अवैध रेत कारोबार का साम्राज्य चला रहे हैं। इनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि पहले की कार्रवाई भी महज दिखावा बनकर रह गई थी। सवाल उठ रहा है कि जब धर्मकांटा पहले सील किया गया था तो ताला तोड़कर ठेकेदारों ने दोबारा कैसे चालू कर दिया? और सबसे अहम सवाल क्या इन रसूखदार ठेकेदारों पर अब सचमुच नकेल कसी जाएगी या फिर यह कार्रवाई भी चुपचाप ठंडी पड़ जाएगी? विश्वसनीय सूत्रों से यह भी जानकारी निकाल कर आ रही है की तेलंगाना बॉर्डर से भोपालपटनम लगभग 40 किलोमीटर के आसपास है जो गाड़ियां माल भरने भोपालपटनम आ रही हैं उन गाड़ियों का छत्तीसगढ़ परमिट नहीं है उसके बाद भी छत्तीसगढ़ आकर माल भर के जा रहे हैं यह भी एक जांच का विषय है आरटीओ के अधिकारियों को इस ओर भी ध्यान देना होगा शासन का लाखों का नुकसान हो रहा है।

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