जगदलपुर । ऐतिहासिक रियासत कालीन भैरव मंदिर में किया जाने वाला वार्षिक जात्रा उत्सव कार्यक्रम उत्कल समाज बस्तर संभाग द्वारा स्थानीय पंचपथ स्थित भैरव मंदिर में प्रतिवर्ष किया जाता रहा है । इस वर्ष भी इसे बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है ।

आज कार्यक्रम के पूर्व संध्या पर नवगठित उत्कल महिला विंग के द्वारा सुंदरकांड का पाठ एवं अन्न भोग का आयोजन किया गया । कल रविवार को मुख्य कार्यक्रम प्रातःपूजन आरती के पश्चात् बली प्रसाद का कार्यक्रम किया जाएगा । कार्यक्रम के संबंध में उत्कल समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष राजेश दास ने बताया कि उत्कल समाज द्वारा सैकड़ो वर्षों से भैरव बाबा की पूजा अर्चना किया जाता रहा है । और आज भी उसी आस्था विश्वास एवं परंपरा के साथ किया जा रहा है । उत्कल समाज के वरिष्ठ सदस्य पंडित दिनेश दास ने बताया कि बाबा का जात्रा उत्सव सावन महीने में किया जाता है । विगत लगभग 350 वर्षों से उत्कल समाज द्वारा यह पूजन कार्यक्रम किया जाता रहा है ,जो आज पर्यंत अनवरत जारी है ।

बता दें पंचपथ स्थित भैरव मंदिर रियासत कालीन है ।इसे महाराजा प्रवीर चंद भंज देव के द्वारा निर्माण करवाया गया था । इस पर उत्कल समाज के लोगों ने बताया भैरव स्वयंभू है अर्थात साक्षात वे स्वयं प्रकट हुए हैं ।साथ ही समाज के वरिष्ठ पुरोहित बामदेव मिश्रा ने इसे पौराणिक बताया ,उन्होंने कहा सच्चे मन से से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है, ।
प्रचलित मान्यता
पुजारी श्री रमेश नंद ने बड़ी ही रोचक जानकारी देते हुए कहा कि माता दंतेश्वरी के दर्शन करने हजारों भक्त प्रतिवर्ष जगदलपुर आते हैं, परन्तु जानकारी के अभाव में बाबा भैरव के दर्शन से वंचित रह जाते हैं । पंडित जी ने बताया कि माता के भक्तों को यह जानकारी दी जानी चाहिए ,कि बगैर बाबा के दर्शन के माता का दर्शन पुण्य लाभ उन्हें नहीं मिलेगा ।मान्यता है कि देवी के दर्शन के पश्चात भैरव बाबा के दर्शन करने पर ही दर्शन का पुण्य लाभ भक्त को प्राप्त होता है । पंडित जी ने प्रमाण के स्वरूप दंतेश्वरी .दंतेवाड़ा के दर्शन के पश्चात भैरव बाबा के दर्शन एवं वैष्णो देवी माता के दर्शन के पश्चात भैरव बाबा के दर्शन को उन्होंने उदाहरण स्वरूप बताया ।




